शराब, कुल्हाड़ी और बिरयानी: सरगुजा में बेटे की हैवानियत

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के बहेरापारा में सोमवार रात जो हुआ, उसने मोहल्ले की खामोशी चीर दी। 25 साल का प्रभात केरकेट्टा उर्फ लेदा, जो शराब की लत को लेकर अक्सर पिता से उलझता था, इस बार बहस को खून में बदल बैठा। करीब 11 बजे नशे में धुत होकर वह पिता परस केरकेट्टा के घर पहुंचा। टोका-टाकी हुई। आवाजें ऊंची हुईं। और फिर गुस्से ने होश पर कुल्हाड़ी चला दी।

गुस्से के वार, मौके पर मौत

पुलिस के मुताबिक, प्रभात ने घर में रखी कुल्हाड़ी उठाई और पिता के सिर पर कई वार किए। वार इतने तेज थे कि 50 वर्षीय परस की मौके पर ही मौत हो गई। यह कोई अचानक धक्का-मुक्की नहीं थी—यह बेरहमी थी। घटना के बाद आरोपी ने शव को घसीटा, घर के पास बने पानी के टैंक में फेंका और ऐसे बाहर निकला जैसे कुछ हुआ ही न हो।

हत्या के बाद बिरयानी

क्राइम की इस कहानी का सबसे सर्द हिस्सा यहीं खत्म नहीं होता। पिता की हत्या के बाद प्रभात पास की दुकान पर गया, बिरयानी खरीदी, खाई और फिर अपने किराए के कमरे में जाकर सो गया। यह व्यवहार सिर्फ अपराध नहीं, संवेदनहीनता की चरम सीमा है।

पड़ोसियों की गवाही और पुलिस की कार्रवाई

पड़ोसी राकेश प्रधान के मुताबिक, शराब को लेकर पिता-पुत्र के बीच अक्सर झगड़े होते थे। सोमवार रात भी चीख-पुकार सुनाई दी थी। सुबह जब परस घर से बाहर नहीं निकले तो शक गहराया। सूचना पर मणिपुर थाना पुलिस पहुंची। पानी की टंकी से शव बरामद हुआ। थाना प्रभारी सीपी तिवारी ने पुष्टि की कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और फोरेंसिक जांच जारी है।

शराब की लत या सिस्टम की विफलता?

यह मामला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं। सवाल बड़ा है क्या शराब की बढ़ती लत छोटे शहरों में हिंसा की जड़ बनती जा रही है? हर गली में खुलती दुकानें, हर घर में बढ़ती बहसें और कई बार अंजाम मौत। सरगुजा की यह घटना चेतावनी है कि नशा सिर्फ जेब नहीं, रिश्ते और जिंदगी भी खत्म कर देता है।

कानून अपना काम करेगा, लेकिन…

आरोपी जेल जाएगा, चार्जशीट बनेगी, कोर्ट फैसला सुनाएगा। लेकिन उस घर की खामोशी कौन भरेगा? उस पानी की टंकी का सन्नाटा कितने सवाल छोड़ेगा? Ground पर खड़े होकर यह साफ दिखता है यह सिर्फ हत्या नहीं, सामाजिक गिरावट का आईना है।

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